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हसदेव नदी, जंगल व पर्यावरण को बचाने, आदिवासियों की आजीविका, संस्कृति और संविधान को बचने का आह्वान

  • 2 जून 2022
  • 4 मिनट पठन


हसदेव अरण्य क्या है?

छत्तीसगढ़ का हसदेव अरण्य उत्तरी कोरबा, दक्षिणी सरगुजा व सूरजपुर जिले में स्थित एक विशाल व समृद्ध वन है वन क्षेत्र जो जैव-विविधता से परिपूर्ण हसदेव नदी और उस पर बने मिनीमाता बांगो बांध का कैचमेंट है - जो जाांजगीर-चाम्पा, कोरबा, बिलासपुर जिले के नागरिको और खेतो की प्यास बुझाता है l यह वन क्षेत्र सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नही बल्कि मध्य-भारत का एक समृद्ध वन है जो मध्य प्रदेश के कान्हा के जंगलो को झारखण्ड के पलामू के जंगलो से जोड़ता है l यह हाथी जैसे 25 महत्वपूर्ण वन्य प्राणियों का रहवास और उनके आवाजाही के रास्ते का भी वन क्षेत्र हैl




यहां खनन को लेकर क्या मामला है?

वर्ष 2010 में स्वयं केंद्रीय वन पर्यावरण व जलवायु पर्यावरण मंत्रालय ने सम्पूर्ण हसदेव अरण्य क्षेत्र में खनन को प्रतिबंधित रखते हुए नो-गो (No-Go) क्षेत्र घोषित किया था l कॉपोरेट के दवाब में इसी मंत्रालय के वन सलाहकार समिति (FAC) ने खनन की अनुमति नहीं देने के निर्णय से विपरीत जाकर परसा ईस्ट और केते बासन कोयला खनन परियोजना को वन स्वीकृति दी थी, जिसे वर्ष 2014 में माननीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने निरस्त भी कर दिया l


हाल ही में WII (भारतीय वन्य जीव संस्थान) की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा है की हसदेव अरण्य समृद्ध, जैव-विविधता से परिपूर्ण वन क्षेत्र है l इसमें कई विलुप्त प्राय वन्यप्राणी आज भी मौजूद हैl वर्तमान संचालित परसा ईस्ट केते बासन कोल ब्लॉक को बहुत ही नियंत्रित तरीके से खनन करते हुए शेष संपूर्ण हसदेव अरण्य क्षेत्र को तत्काल नो गो घोषित किया जाएl


अभी की स्थिति क्या है?

दुखद रूप से हसदेव अरण्य क्षेत्र की समृद्धता, पर्यावरणीय महत्व और उसकी आवश्यकता को समझते हुए भी केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक अडानी कंपनी के मुनाफे के लिए इसका विनाश कर रही है l


हाल ही में नए परसा कोल ब्लॉक और पूर्व संचालित परसा ईस्ट केते बासेन कोल ब्लॉक के दूसरे चरण में खनन की अनुमति हेतु छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दी गई अन्तिम वन स्वीकृति से लगभग 6 हजार एकड़ क्षेत्रफल में 4 लाख 50 हज़ार पेड़ों को काटा जायेगाl ये साल के प्राकृतिक जंगल है जिनका आज तक पौधरोपण संभव नहीं हो सका है- वैसे भी एक बार जंगल काट दिए इंसानो द्वारा उन्हें दोबारा नहीं उगाया जा सकता l


कानूनी मामला क्या है?

हसदेव अरण्य को बचाने एक दशक से चल रहे आन्दोलन में आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को हमेशा नजरअंदाज किया गया है l हसदेव अरण्य संविधान की पाांचवी अनुसूची क्षेत्र है l अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभाओ को अपने जल-जंगल-जमीन, आजीविका एवं संस्कृति की रक्षा करने का संवैधानिक अधिकार है l


भारतीय संसद द्वारा बनाए गए पेसा अधिनियम 1996 और वनाधिकार मान्यता कानून 2006 ग्रामसभा के अधिकारों को और अधिक शक्ति प्रदान करते है l परसा कोल ब्लॉक के लिए बेयरिंग एक्ट 1957 के तहत जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है वह भी बिना ग्राम सभा सहमति के l इइस कोल् ब्लॉक की स्वीकृति भी ग्राम सभा का फ़र्ज़ी प्रस्ताव बनाकर हासिल की गई है l


बिना सहमति के भूमि अधिग्रहण और वन स्वीकारती को निरस्त करने हसदेव अरण्य के ग्रामीणो ने वर्ष 2019 में ग्राम फतेहपुर में 75 दिनों तक धरना प्रदर्शन किया लेकिन राज्य सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया l अक्टूबर 2021 में हसदेव से रायपुर तक 300 किलोमीटर पैदल मार्च किया गया l स्वंय मुख्यमंत्री जी से मुलाकात और कई बार ज्ञापन सोपने के बाद भी आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई बल्कि इसके विपरीत अडानी कंपनी के खनन कार्य अवैध और गैरकानूनी रूप से शुरू करवाया जा रहा है l




राज्य सरकारों और ने इन कोल ब्लॉकों को विकसित करने और खनन (MDO) के नाम पर अडानी कम्पनी को सौंप दिए साथ ही इन राज्य सरकारों ने नागरिकों के हितों को ताक रखकर बाज़ार मूल्यों से भी अधिक दर्रो पर अडानी समूह से कोयला लेने के अनुबंध जो एक नया कोयला घोटाला भी है l


ग्राम सभाओं के द्वारा कोल ब्लॉक आवंटन का विरोध व आंदोलन के बाद उन 2015 में कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यकक्ष श्री राहुल गाँधी जी छत्तीसगढ़ कांग्रेस टीम की पूरी टीम के साथ पूर्व चर्चा और सहमति के बाद हमारे गांव मदनपुर आये थे, उन्होंने चौपाल लगाकर समस्त आदिवासियों को आस्वस्त किया था की उनकी पार्टी हमारे इस संघर्ष में खड़ी है और जंगल जमीन का विनाश होने नहीं देगी परन्तु कांग्रेस पार्टी आज राज्य में सत्ता में होने के बाद अपने उस वादे से मुकरते हुए मोदी सर्कार की सहयोगी बनकर अडानी कम्पनी के लिए हसदेव के आदिवासियों से उनके हमारे जंगल छीन रही है l



आप हसदेव के पक्ष में कैसे खड़े हो सकते हैं?

अपने जल, जमीन, पर्यावरण और वन्य प्राणियों के संरक्षण और सांविधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए पिछले एक दशक से चल रहेशान्तिपूर्ण लोकतान्त्रिक आंदोलन को मजबूत करने आपके सहयोग और सहभागिता की अपेक्षा के साथ 4 MAY 2022 (आज) को अपने अपने क्षेत्र मई आवाज़ बुलंद करे


ये लड़ाई देश के किसी एक भाग में चल रही लड़ाई नही- बल्की हम सबकी लड़ाई है परकारती को बचाने की, कानून और न्याय व्यवस्था को लागु करने की- जलवायु परिवर्तन से उत्पन हुई भीषण स्थिति की मार हम सब झेल रहे है- बेहद जरुरी है की अब हम हम सब मिलकर साथ आ पाए


आपके साथ कितने भी लोग हो सके- आप पोस्टर या बैनर लेकर अपनी बात रख सकते है - फोटो या वीडियो आप अपनी जगह से ही सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए इस सांकेतिक विरोध में अपने समर्थन दे सकते है.. अगर संभव हो तो आपके शहर, गाँव या तहसील में एक साथ आकर भी हसदेव के लोगों को अपना समर्थन दे


#SaveHasdeo #IStandWithHasdeo #Environment #ClimateChange #हसदेव_बचेगा_तो_देश_बचेगा

 
 
 

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